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17 अगस्त को उज्जैन में बनेगा दुर्लभ संयोग, तीसरी शाही सवारी के साथ खुलेंगे नागचंद्रेश्वर के पट
उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में इस वर्ष सावन के दौरान एक दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। 17 अगस्त को सावन की तीसरी शाही सवारी और नागपंचमी एक ही दिन पड़ रही है। इसी दिन वर्ष में केवल एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। दोनों बड़े धार्मिक आयोजनों के एक साथ होने से लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मंदिर प्रशासन के अनुसार ऐसा संयोग 2019 के बाद पहली बार बन रहा है। इससे पहले भी तीसरी सवारी और नागपंचमी एक ही दिन होने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे।
महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्ष में केवल नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए खोला जाता है। मान्यता है कि यहां स्थापित भगवान शिव, माता पार्वती और नागराज की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन का अवसर वर्ष में केवल एक बार ही मिलता है। यह प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है और अपनी तरह की अनूठी प्रतिमा है।
महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि तीसरी शाही सवारी और नागपंचमी एक साथ होने के कारण श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए अलग से बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में पुलिस, प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारी शामिल होंगे तथा दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए विशेष योजना तैयार की जाएगी।
प्रशासन को उम्मीद है कि इस दुर्लभ धार्मिक संयोग के चलते देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे, जिसके मद्देनजर सुरक्षा, यातायात और दर्शन व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।
मंदिर प्रशासन के अनुसार ऐसा संयोग 2019 के बाद पहली बार बन रहा है। इससे पहले भी तीसरी सवारी और नागपंचमी एक ही दिन होने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे।
महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्ष में केवल नागपंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए खोला जाता है। मान्यता है कि यहां स्थापित भगवान शिव, माता पार्वती और नागराज की दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन का अवसर वर्ष में केवल एक बार ही मिलता है। यह प्रतिमा 11वीं शताब्दी की मानी जाती है और अपनी तरह की अनूठी प्रतिमा है।
महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि तीसरी शाही सवारी और नागपंचमी एक साथ होने के कारण श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए अलग से बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में पुलिस, प्रशासन और मंदिर समिति के अधिकारी शामिल होंगे तथा दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए विशेष योजना तैयार की जाएगी।
प्रशासन को उम्मीद है कि इस दुर्लभ धार्मिक संयोग के चलते देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे, जिसके मद्देनजर सुरक्षा, यातायात और दर्शन व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।
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